🟢 संधि और समास —
🔵 भाग–A : संधि
1. संधि की परिभाषा
संधि का अर्थ है—दो वर्णों या शब्दों के पास-पास आने पर उनके मेल से होने वाला ध्वनि या वर्ण परिवर्तन।
उदाहरण:
विद्या + आलय = विद्यालय
यहाँ आ + आ = आ हुआ है।
संधि के मुख्य प्रकार
- स्वर संधि
- व्यंजन संधि
- विसर्ग संधि
2. स्वर संधि
जब दो स्वरों के मेल से परिवर्तन होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं।
इसके प्रमुख प्रकार हैं:
- दीर्घ संधि
- गुण संधि
- वृद्धि संधि
- यण संधि
- अयादि संधि
3. दीर्घ संधि
जब समान स्वर आपस में मिलकर अपने दीर्घ स्वर में बदल जाते हैं, तो दीर्घ संधि होती है।
नियम
| मिलने वाले स्वर | परिणाम |
|---|---|
| अ + अ | आ |
| अ + आ | आ |
| आ + अ | आ |
| आ + आ | आ |
| इ + इ | ई |
| इ + ई | ई |
| ई + इ | ई |
| ई + ई | ई |
| उ + उ | ऊ |
| उ + ऊ | ऊ |
| ऊ + उ | ऊ |
| ऊ + ऊ | ऊ |
उदाहरण
1. हिम + आलय = हिमालय
इ + आ → यहाँ स्वर परिवर्तन से हिमालय बनता है।
2. विद्या + आलय = विद्यालय
आ + आ → आ
3. रवि + इंद्र = रवींद्र
इ + इ → ई
4. सु + उक्ति = सूक्ति
उ + उ → ऊ
याद रखें:
समान स्वर + समान स्वर = दीर्घ स्वर
4. गुण संधि
जब अ या आ के बाद इ/ई, उ/ऊ या ऋ आए, तो गुण संधि होती है।
नियम
| स्वर | परिणाम |
|---|---|
| अ/आ + इ/ई | ए |
| अ/आ + उ/ऊ | ओ |
| अ/आ + ऋ | अर् |
उदाहरण
1. नर + इंद्र = नरेंद्र
अ + इ → ए
2. देव + इंद्र = देवेंद्र
अ + इ → ए
3. महा + ईश = महेश
आ + ई → ए
4. पर + उपकार = परोपकार
अ + उ → ओ
5. हित + उपदेश = हितोपदेश
अ + उ → ओ
6. महा + ऋषि = महर्षि
आ + ऋ → अर्
ट्रिक:
इ/ई → ए, उ/ऊ → ओ, ऋ → अर्
5. वृद्धि संधि
जब अ या आ के बाद ए/ऐ या ओ/औ आए, तो वृद्धि संधि होती है।
नियम
| स्वर | परिणाम |
|---|---|
| अ/आ + ए/ऐ | ऐ |
| अ/आ + ओ/औ | औ |
उदाहरण
1. सदा + एव = सदैव
आ + ए → ऐ
2. तथा + एव = तथैव
आ + ए → ऐ
3. महा + औषधि = महौषधि
आ + औ → औ
4. वन + औषधि = वनौषधि
अ + औ → औ
ट्रिक:
ए/ऐ → ऐ
ओ/औ → औ
6. यण संधि
जब इ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद कोई असमान स्वर आता है, तो क्रमशः य्, व्, र् हो जाते हैं।
नियम
| पहला स्वर | परिवर्तन |
|---|---|
| इ/ई | य् |
| उ/ऊ | व् |
| ऋ | र् |
उदाहरण
1. इति + आदि = इत्यादि
इ → य्
2. यदि + अपि = यद्यपि
इ → य्
3. सु + आगत = स्वागतम्
उ → व्
4. अनु + एषण = अन्वेषण
उ → व्
5. पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
ऋ → र्
याद रखें:
इ → य्, उ → व्, ऋ → र्
7. अयादि संधि
जब ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई स्वर आता है, तो उनमें क्रमशः परिवर्तन होता है:
| स्वर | परिवर्तन |
|---|---|
| ए | अय् |
| ऐ | आय् |
| ओ | अव् |
| औ | आव् |
उदाहरण
1. ने + अन = नयन
ए → अय्
2. गै + अक = गायक
ऐ → आय्
3. भो + अन = भवन
ओ → अव्
4. पौ + अक = पावक
औ → आव्
ट्रिक:
ए → अय्
ऐ → आय्
ओ → अव्
औ → आव्
8. व्यंजन संधि
जब दो वर्णों के मिलने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं।
उदाहरण
सत् + जन = सज्जन
त् का परिवर्तन होकर ज्ज हो गया।
दिक् + गज = दिग्गज
क् → ग्
वाक् + ईश = वागीश
क् → ग्
सत् + चरित्र = सच्चरित्र
त् → च्
उत् + हार = उद्धार
त् → द् और आगे ध्वनि परिवर्तन
कुछ सामान्य उदाहरण
| संधि-विच्छेद | संधि शब्द |
|---|---|
| सत् + जन | सज्जन |
| दिक् + गज | दिग्गज |
| वाक् + ईश | वागीश |
| उत् + चारण | उच्चारण |
| तत् + रूप | तद्रूप |
| जगत् + ईश | जगदीश |
9. विसर्ग संधि
जब विसर्ग (ः) के बाद किसी वर्ण के आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
उदाहरण
मनः + हर = मनोहर
ः → ओ
यशः + दा = यशोदा
ः → ओ
तपः + वन = तपोवन
ः → ओ
निः + कपट = निष्कपट
ः → ष्
निः + फल = निष्फल
ः → ष्
दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
ः → श्
महत्वपूर्ण उदाहरण
| संधि-विच्छेद | संधि |
|---|---|
| मनः + हर | मनोहर |
| यशः + दा | यशोदा |
| तपः + वन | तपोवन |
| निः + कपट | निष्कपट |
| निः + फल | निष्फल |
| दुः + चरित्र | दुश्चरित्र |
10. संधि-विच्छेद
किसी संधियुक्त शब्द को उसके मूल शब्दों में अलग करना संधि-विच्छेद कहलाता है।
उदाहरण
विद्यालय
= विद्या + आलय
महेश
= महा + ईश
परोपकार
= पर + उपकार
सदैव
= सदा + एव
इत्यादि
= इति + आदि
सज्जन
= सत् + जन
मनोहर
= मनः + हर
📝 संधि-विच्छेद अभ्यास
प्रश्न:
- देवेंद्र
- महेश
- परोपकार
- सदैव
- इत्यादि
- सज्जन
- दिग्गज
- मनोहर
- तपोवन
- निष्फल
उत्तर:
- देवेंद्र = देव + इंद्र
- महेश = महा + ईश
- परोपकार = पर + उपकार
- सदैव = सदा + एव
- इत्यादि = इति + आदि
- सज्जन = सत् + जन
- दिग्गज = दिक् + गज
- मनोहर = मनः + हर
- तपोवन = तपः + वन
- निष्फल = निः + फल
🟠 भाग–B : समास
11. समास की परिभाषा
दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।
समास से बने शब्द को समस्त पद कहते हैं और उसे अलग-अलग करके समझाने को समास-विग्रह कहते हैं।
उदाहरण:
राजा का पुत्र = राजपुत्र
यहाँ राजा का और पुत्र मिलकर राजपुत्र बने।
समास के प्रमुख प्रकार
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्विगु
- द्वंद्व
- बहुव्रीहि
12. अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद प्रधान होता है और पूरा समस्त पद प्रायः अव्यय की तरह प्रयोग होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
उदाहरण
प्रतिदिन
= प्रत्येक दिन
यथाशक्ति
= शक्ति के अनुसार
यथासंभव
= जितना संभव हो
आजीवन
= जीवन भर
भरपेट
= पेट भरकर
पहचान:
अक्सर इनमें प्रति, यथा, आ, भर आदि आते हैं।
13. तत्पुरुष समास
जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच किसी कारक-चिह्न का संबंध होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
उदाहरण
राजपुत्र
= राजा का पुत्र
यहाँ "का" छिपा हुआ है।
गृहप्रवेश
= गृह में प्रवेश
देशभक्ति
= देश के प्रति भक्ति
हस्तलिखित
= हाथ से लिखित
धनहीन
= धन से हीन
कारक के अनुसार उदाहरण
| संबंध | उदाहरण | विग्रह |
|---|---|---|
| का/के/की | राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| को | स्वर्गप्राप्त | स्वर्ग को प्राप्त |
| से | रोगमुक्त | रोग से मुक्त |
| के लिए | विद्यालय | विद्या के लिए आलय |
| में | गृहप्रवेश | गृह में प्रवेश |
| पर | घुड़सवार | घोड़े पर सवार |
14. कर्मधारय समास
जिस समास में एक पद दूसरे पद की विशेषता बताता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
इसमें प्रायः विशेषण + विशेष्य का संबंध होता है।
उदाहरण
नीलकमल
= नीला है जो कमल
महापुरुष
= महान है जो पुरुष
पीतांबर
= पीला है जो अंबर
चंद्रमुख
= चंद्रमा के समान मुख
कालीमिर्च
= काली है जो मिर्च
पहचान:
एक पद दूसरे पद की विशेषता बताता है।
15. द्विगु समास
जिस समास का पहला पद संख्यावाचक हो और पूरे शब्द से किसी समूह या समुदाय का बोध हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।
उदाहरण
नवरात्र
= नौ रातों का समूह
त्रिलोक
= तीन लोकों का समूह
चौराहा
= चार राहों का समूह
सप्तर्षि
= सात ऋषियों का समूह
पंचवटी
= पाँच वटों का समूह
पहचान:
पहला पद अक्सर संख्या होता है।
16. द्वंद्व समास
जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और उनके बीच और/तथा लगाया जा सकता है, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
उदाहरण
माता-पिता
= माता और पिता
दिन-रात
= दिन और रात
सुख-दुःख
= सुख और दुःख
राम-लक्ष्मण
= राम और लक्ष्मण
भाई-बहन
= भाई और बहन
पहचान:
विग्रह में और/तथा आता है।
17. बहुव्रीहि समास
जिस समास में न तो पहला पद प्रधान होता है और न दूसरा, बल्कि पूरा समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
उदाहरण
दशानन
= दस हैं आनन जिसके — रावण
नीलकंठ
= नीला है कंठ जिसका — शिव
चतुर्भुज
= चार हैं भुजाएँ जिसकी — विष्णु
लंबोदर
= लंबा है उदर जिसका — गणेश
पीतांबर
= पीला है अंबर जिसका — श्रीकृष्ण
पहचान:
विग्रह में अक्सर "जिसका/जिसके/जिसकी" आता है।
18. समास-विग्रह
समस्त पद को उसके विस्तृत रूप में अलग करके लिखना समास-विग्रह कहलाता है।
उदाहरण
| समस्त पद | समास-विग्रह | समास |
|---|---|---|
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन | अव्ययीभाव |
| राजपुत्र | राजा का पुत्र | तत्पुरुष |
| नीलकमल | नीला है जो कमल | कर्मधारय |
| त्रिलोक | तीन लोकों का समूह | द्विगु |
| माता-पिता | माता और पिता | द्वंद्व |
| दशानन | दस हैं आनन जिसके | बहुव्रीहि |
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार | अव्ययीभाव |
| देशभक्ति | देश के प्रति भक्ति | तत्पुरुष |
| महापुरुष | महान है जो पुरुष | कर्मधारय |
| पंचवटी | पाँच वटों का समूह | द्विगु |
| सुख-दुःख | सुख और दुःख | द्वंद्व |
| नीलकंठ | नीला है कंठ जिसका | बहुव्रीहि |
⭐ समास पहचानने की आसान ट्रिक
1️⃣ अव्ययीभाव
पहला पद प्रधान
👉 प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
2️⃣ तत्पुरुष
दूसरा पद प्रधान + कारक छिपा होता है
👉 राजपुत्र = राजा का पुत्र
3️⃣ कर्मधारय
विशेषण + विशेष्य
👉 नीलकमल = नीला कमल
4️⃣ द्विगु
पहला पद संख्या
👉 त्रिलोक = तीन लोकों का समूह
5️⃣ द्वंद्व
दोनों पद प्रधान + "और"
👉 माता-पिता = माता और पिता
6️⃣ बहुव्रीहि
किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोध
👉 दशानन = दस हैं आनन जिसके → रावण
📝 परीक्षा अभ्यास — समास-विग्रह
प्रश्न
- राजमहल
- नीलकमल
- प्रतिदिन
- पंचवटी
- माता-पिता
- दशानन
- यथाशक्ति
- देशभक्ति
- महापुरुष
- त्रिलोक
उत्तर
1. राजमहल
राजा का महल → तत्पुरुष
2. नीलकमल
नीला है जो कमल → कर्मधारय
3. प्रतिदिन
प्रत्येक दिन → अव्ययीभाव
4. पंचवटी
पाँच वटों का समूह → द्विगु
5. माता-पिता
माता और पिता → द्वंद्व
6. दशानन
दस हैं आनन जिसके → बहुव्रीहि
7. यथाशक्ति
शक्ति के अनुसार → अव्ययीभाव
8. देशभक्ति
देश के प्रति भक्ति → तत्पुरुष
9. महापुरुष
महान है जो पुरुष → कर्मधारय
10. त्रिलोक
तीन लोकों का समूह → द्विगु
🎯 संधि और समास में अंतर
| संधि | समास |
|---|---|
| वर्णों/ध्वनियों का मेल | शब्दों का मेल |
| वर्ण परिवर्तन हो सकता है | शब्द संक्षिप्त होते हैं |
| संधि-विच्छेद किया जाता है | समास-विग्रह किया जाता है |
| विद्यालय = विद्या + आलय | राजपुत्र = राजा का पुत्र |
सबसे महत्वपूर्ण याद रखने योग्य बात
संधि = वर्णों का मेल
समास = शब्दों का मेल
संधि-विच्छेद: विद्यालय → विद्या + आलय
समास-विग्रह: राजपुत्र → राजा का पुत्र